For Dad,..

पापा, पहले पैरों, फिर दो पहियों से, चलना और आगे बढ़ना सिखाया है आपने। रास्ता चाहे जैसा भी हो, मैं मंज़िल को पाउँगी ऐसा हौसला जगाया है आपने। चाहे मुठ्ठी में आसमाँ हो, सितारों का जहाँ हो, अपनी जड़ों से जुड़े रहना सिखाया है आपने। हर चीज़ की अहमियत के बारे में, एक पाठ पढ़ाया …

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